125 साल पहले विवेकानंद ने दुनिया को दिखाया था नया रास्ता: मोदी

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modi address to youths on 125th anniversary on swami vivekanand
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नरेंद्र मोदी ने सोमवार को दिल्ली के साइंस सेंटर में देशभर की यूनिवर्सिटी और कॉलेजों के स्टूडेंट्स को संबोधित किया। इसके लाइव टेलिकास्ट के लिए यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (UGC) ने पहले ही सर्कुलर जारी किया था। पीएम की स्पीच की थीम स्वामी विवेकानंद के शिकागो विश्व धर्म संसद में दिए भाषण के 124 साल पूरे होने और पंडित दीनदयाल उपाध्याय शताब्दी समारोह पर रखी गई है।

विवेकानंद पर बोले मोदी-

पीएम मोदी ने कहा कि विवेकानंद एक ऐसे युवा थे जिन्होंने सवा सौ साल पहले दुनिया को एक नया रास्ता दिखाया था। हैरानी की बात है कि लोगों को पहले इस तारीख का महत्व पता नहीं था। लड़कियों के प्रति आदर भाव ने न देखने पर पीएम ने चिंता जताई और कहा कि जो लोग इस रवैये को अपनाते हैं वे उनके आगे नमन करता हूं। महिलाओं को बराबरी की भाव से नहीं देखते हैं, तो उन लोगों को स्वामी विवेकानंद के विचारों पर तालियां बजाने का कोई हक नहीं। मैं युवा साथियों का अभिनंदन करता हूं। आज 11 सितंबर है। विश्व को 2001 से पहले ये पता नहीं था कि 9/11 का महत्व क्या है। दोष दुनिया का नहीं था, उन्हें ये पता ही नहीं था। दोष हमारा था कि हमने ही उसे भुला दिया था। और हम न भुला देते तो शायद 21वीं सदी का 9/11 नहीं होता।” सवा सौ साल पहले भी एक 9/11 था, जिस दिन एक नौजवान ने, करीब-करीब आपकी उम्र का, गेरुआ कपड़ों में, जिसकी किसी ने कल्पना नहीं की होगी। गुलाम भारत में उसके चिंतन और भाषण में ये कहीं नहीं दिखती थी। हजार साल की गुलामी के बाद भी उसके मन में विचार उमड़ रहे थे। हमारे देश में ये बात है कि चाहे कितनी भी नेगेटिव बातें क्यों न हों, इस महापुरुष में आखिर कौन सी ताकत थी कि उसके अंदर आग धधक रही थी। और वो दुनिया को एक सार्थक रास्ता दिखाने का प्रयास करता है। दुनिया को ये पता भी नहीं था कि लेडीज एंड जेंटेलमेंट के अलावा भी कोई शब्द हो सकते हैं। लेकिन जिस वक्त माई ब्रदर्स एंड सिस्टर्स शब्द निकले, हर किसी का दिल जीत लिया। विवेकानंद जी के दो रूप देखने को मिलते हैं। जहां भी गए पूरे विश्वास के साथ भारत के महिमामंडन करने में कभी थकते नहीं थे। दूसरे रूप में जब भारत में बात करते थे तो हमारे समाज की बुराईयों पर कठोराघात करते थे। आवाज उठाते थे। तब पूजा-पाठ, अंध परंपराएं थीं। एक 30 साल का नौजवान ऐसे वक्त में ये कहने कि हिम्मत दिखाता था कि पूजा-पाठ से कोई भगवान नहीं मिलता है। जाओ गरीबों की सेवा करो।

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