GAYATRI PARIWAR द्वारा आयोजित 9 दिवसीय गर्भोत्सव कार्यशाला का हुआ समापन

अखिल विश्व गायत्री परिवार द्वारा आयोजित 2 से 10 अगस्त तक “आओ गढ़े संस्कारवान पीढ़ी” के अंतर्गत गर्भ ज्ञान विज्ञान कार्यशाला का समापन महिला आयोग की अध्यक्ष किरणमयी नायक के मुख्य आतिथ्य में गर्भोत्सव संस्कार के साथ किया गया। कार्यक्रम का संचालन शांतिकुंज हरिद्वार से आओ गड़े संस्कारवान पीढ़ी की राष्ट्रीय प्रभारी डॉ गायत्री शर्मा द्वारा किया गया। डॉक्टर किरणमयी नायक ने कहा कि आज संस्कारों का एक प्रकार से लोप हो गया है।

गायत्री परिवार ने संस्कारों की पंरपरा को फिर से शुरू किया है। इसमें पुंसवन संस्कार भी शामिल है। आने वाला शिशु अपने माता-पिता, कुल, परिवार तथा समाज के लिए विडंबना न बने, अपने सौभाग्य और गौरव का कारण बने इसलिए गर्भस्थ शिशु के शारीरिक बौद्धिक तथा भावनात्मक विकास के लिए यह संस्कार आवश्यक है। इससे जीव के पहले वाले संस्कारों का निवारण होकर नए संस्कारों की स्थापना होती है। छत्तीसगढ़ गायत्री परिवर की आओ गढ़े संस्कारवान पीढ़ी की प्रान्त संयोजीका रुपाली गाँधी और सरला कोसरिया ने जानकारी दी कि 9 दिवसीय इस सेमिनार में विशेषज्ञों और चिकित्सकों के द्वारा वैज्ञानिक आधार पर गर्भ का ज्ञान विज्ञान, गर्भवती की आदर्श दिनचर्या, आहार, गर्भवस्था के योग , ध्यान, प्राणायाम, गर्भ संवाद, गर्भावस्था के तनाव से मुक्ति, मन्त्र और सूक्ष्म यज्ञ का बच्चे पर प्रभाव, स्तनपान और शिशु का पोषक आहार आदि विषयों पर पीपीटी और वीडियो के द्वारा बहुत ही सरल और रोचक ढंग से समझाया गया।

जिसका समापन 10 अगस्त को ऑनलाइन गर्भ संस्कार के साथ किया गया। कार्यशाला के आखिरी दिन शांतिकुंज हरिद्वार से डॉक्टर गायत्री शर्मा जी ने गर्भोत्सव संस्कार की परंपरा पर प्रकाश डालते हुए आज के युग में इसके महत्व पर प्रकाश डाला। सैकड़ो गर्भवती महिलाओं ने घर बैठे गर्भोत्सव संस्कार संपन्न किया। शांतिकुंज हरिद्वार से प्राप्त दिशा निर्देशों के अनुरूप क्रियाएं की गई। वेद मंत्रोच्चार के साथ गर्भवती महिलाओं को औषधि अवध्राण कराया गया। इसके अंतर्गत वट की जटा, गिलोय, पीपल की कौंपल से तैयार द्रव्य सुंघाया गया। साथ ही तीनों औषधियों के गुण गर्भस्थ शिशु में विकसित होने की भावना के साथ यह क्रिया संपन्न की गई।

कार्यशाला में बताया गया कि गर्भ सुनिश्चित हो जाने पर तीन माह में पूरे हो जाने तक पुंसवन संस्कार कर देना चाहिए विलंब से किया जाए तो हर्ज नहीं है किंतु समय पर देने का लाभ विशेष होता है तीसरे माह से गर्भ में आकार और संस्कार दोनों अपना स्वरूप पकडऩे लगते हैं इसलिए उनके लिए आध्यात्मिक उपचार समय पर कर दिया जाना चाहिए। इस कार्यक्रम में प्रतिदिन हजारों की संख्याओं में गर्भवती एवं नव विवाहित महिलाएं समिल्लित हुई।

कार्यक्रम में प्रमुख रूप से शांतिकुंज हरिद्वार से डॉक्टर ओ.पी. शर्मा, सुखदेव निर्मलकर, गायत्री परिवार छत्तीसगढ़ के जोन समन्वयक दिलीप पाणिग्रही,युवा प्रकोष्ठ प्रभारी ओम प्रकाश राठौर, जिला समन्वयक रायपुर से लच्छूराम निषाद, सरला कोसरिया, रुपाली गांधी एवं गायत्री परिवार के सदस्य तथा महिला बाल विकास विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।

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