Tuesday, December 6, 2022
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दिल्ली में आज से चल सकेंगी BS-4 डीजल और BS-3 पेट्रोल गाड़ियां

BS 4 diesel and BS 3 petrol vehicles will be able to run in Delhi from today
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दिल्ली में 13 नवम्बर तक के लिए BS-4 डीजल और BS-3 पेट्रोल गाड़ियों पर प्रतिबंध का आदेश लागू था. इसे आगे जारी रखने का कोई आदेश जारी नहीं हुआ है. 

BS-4 डीजल और BS-3 पेट्रोल गाड़ियों पर प्रतिबंध का आदेश 13 नवम्बर की रात में समाप्त हो गया. सोमवार की सुबह से दिल्ली में यह वाहन पूर्ववत चल सकेंगे.

दिल्ली सरकार के परिवहन विभाग के एक अधिकारी ने रविवार को कहा कि “बीते कुछ दिनों से AQI लेवल स्थिर है. बैन को लेकर नया आदेश जारी नहीं हुआ है. ऐसे में कल से यह प्रभावी नहीं रहेगा. हम सिचुएशन को मॉनिटर कर रहे हैं, अगर आने वाले दिनों में AQI में बढ़ोतरी होती है, तो हम सिचुएशन को रिव्यू करेंगे.”

Second Half में कमजोर Story और Screenplay फ़िल्म को ले डूबी : ‘Chup’ Film Review

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Review by – Abhinandan kumar (Former RJ at Radio Mayur 90.8 FM)

“ज़िंदा रहने के लिए सिनेमा चाहिए”, “लाइफ में Lion बनना है तो ‘बकरा’ बनने की हिम्मत होनी चाहिये”, “कागज के फूल बनाने वाले को कागज पर कलम चलाने वालों ने चुप करा दिया था”, ऐसे ही कुछ बेहतरीन Dialogue, खूबसूरत Location, बढ़िया Background Score, R Balki के Experimental Direction और Guru Dutt साहब के फिल्मों की यादों को समेटे है फ़िल्म ‘Chup’ : Revenge of the Artist.

फिल्मी भाषा मे बात करें तो Story अच्छी है, Screenplay First Half का बहुत शानदार है, लेकिन Second Half में सब कुछ कमजोर दिखता है, Dialogue कुछ एक जगह बवाल हैं। कुछ ऐसे Dialogue फ़िल्म में ऐसे हैं जिन्हें आप बाद में सोचने पर मजबूर होंगे और शायद वो Dialogue आपकी ज़िंदगी मे उत्साह और जोश भरने का काम करेगा।

Special Mention:-

जगह – जगह पर Guru Dutt साहब के फिल्मों की तरफ इशारा करती ये फ़िल्म आपको किसी और दुनिया मे ले कर जाएगी। Guru Dutt साहब की फ़िल्म “कागज़ के फूल” का महज़ एक ज़िक्र इस फ़िल्म को चार चाँद लगा देती है। आखिर क्यों है इस फ़िल्म में Guru Dutt साहब का ज़िक्र, इसका जवाब आपको Cinema Hall में मिलेगा।

Story :-

एक Serial Killer की कहानी जो Film Review करने वाले Official Critics की बहुत ही बेरहमी से क़त्ल करता है। जिससे देख आपके मन मे कई सारे सवाल खड़े होंगे जिसे आप अपनी बाहरी दुनिए से जोड़ने पर मजबूर होंगे। कभी वो क़त्ल कर के शरीर को क्रिकेट स्टेडियम में फेंक देता है, तो कभी रेलवे ट्रैक पर कत्ल करता है। क़त्ल करने के दौरान वो हर बार चेहरे पर एक Star का निशान छोड़ जाता है, जिसे Film Review की भाषा मे 1star, 2 Star, 3 Star बोलते है। Serial Killer हर उस Critics के द्वारा लिखे गए Review या Video में बोली गयी बातों को ही अपने क़त्ल का तरीका बनाता है और उन्ही में से एक Film Critics की बेरहमी से क़त्ल करता है। क़त्ल करने के पीछे क्या वहज है ? Killer सिर्फ Film Critics को ही अपना निशाना क्यों बना रहा है ? ये सब बातें आपको फ़िल्म देखते पता लग जाएगी।

Actor Performance :

Serial Killer के किरदार में Dulquer Salmaan ने बहुत ही शानदार काम किया है या यूं कह ले की Dulquer के किरदार को काफी अच्छे से लिखा गया है, जिसे Dulquer ने बहुत ही बखूबी निभाया है। एक Serial Killer के किरदार को निभाते हुए जगह – जगह Dulquer के किरदार में कुछ Romantic पड़ाव भी आते है जिसे Dulquer ने बहुत ही सादगी के साथ निभाया है। Shreya Dhanwanthary एक Entertainment Reporter के किरदार में काफी खूबसूरत दिखती हैं। जितनी बार भी Shreya पर्दे पर आती हैं, दर्शकों का दिल जीत ले जाती हैं। Shreya और Dilquer के साथ जितने भी Frame को फ़िल्माया गया है, वो काफी खूबसूरत लगता है। Dilquer और Shreya के बीच कुछ एक संवाद भी दर्शकों को खूब पसंद आता है। Sunny Deol एक Inspector (Head of Crime Branch) के किरदार में कुछ खास नही कर पाए, या ये कह ले कि Sunny Deol के किरदार को बहुत कमजोर लिखा गया था। Sunny Deol जैसे Actor को इस फ़िल्म में लेकर बस Time Pass किया गया है। Sunny Deol के Acting को इस फ़िल्म में Director दर्शको के सामने रखने ने नाकामयाब दिखते हैं, जो बात कहि ना कहि दर्शको को भी खटकती है। Pooja Bhat एक Criminal Psychologist के किरदार में अच्छा काम किया है। Pooja Bhat का Screen Time काफी कम है, लेकिन उस कम वक्त में भी Pooja Bhatt अपने Acting skills से दर्शकों के बीच अपनी छाप छोड़ पाती हैं। Saranya Ponvannan जिन्होंने Shreya Dhanwanthary के माँ के किरदार में यादगार काम किया है। बाकी बहुत से कलाकार हैं जिन्होंने अपना काम बखूबी किया है।

Writing & Direction

R. Balki ने इस फ़िल्म की कहानी लिखी हैं जो कि इस फ़िल्म के Director भी हैं। यहाँ थोड़ी फिल्मी भाषा मे बात करें तो R. Balki की कुछ पिछली फिल्मों में :- ‘शमिताभ’, ‘Ki & Ka’, ‘Padman’ जैसी फिल्मी आती हैं। इन सभी फिल्मों के Flavor को पकड़े तो ‘Chup’ फ़िल्म काफी अलग हैं। इन सब के बीच कहि न कही एक Suspense Serial Killer फ़िल्म को Direct करने में R. Balki कहि फसते दिखते है। फ़िल्म के First Half में जहाँ कहानी दर्शकों को सिनेमा हॉल की कुर्सियों से बांधे रखती है, तो वहीं Second Half में कहानी काफी कमजोर पड़ जाती है और दर्शक फ़िल्म देखने के बजाए Phone चलाते नज़र आते है। फ़िल्म के Interval Sceen को काफी कमजोर तरीके से फ़िल्माया गया है, जहाँ ऐसा लगता है कि सारे Suspense को Director ने दर्शक के सामने बड़े ही आसानी से पेश कर दिया। जिसके बाद दर्शक Second Half की कहानी ख़ुद ही Decide कर लेते हैं और फ़िल्म से दुबारा जुड़ नही पाते। बची हुई उमीद Climax Sceen भी ले डूबती है, जहाँ Director R. Balki वो Thriller Suspense को भुना नही पाते।

Background Score & Music

फ़िल्म में Background Score दिया है Aman Pant ने, जो कि बहुत खूबसूरत है। जगह – जगह पर कुछ एक Sceen में बैकग्राउंड स्कोर दर्शकों के ध्यान को फ़िल्म के तरफ खिंचने में कामयाब रहती है। एक Suspense Thriller फ़िल्म के नज़रिए से Background Score को 10 में 10 अंक देना लाज़मी है। फ़िल्म में Music ‘Amit Trivedi, Sneha Khanwalkar और S D Burman का है। Amit Trivedi की आवाज़ में गाना काफी शानदार लगता है। कुछ पुराने गाने का भी फ़िल्म में इस्तेमाल किया गया है, जो कि S D Burman साहब ने Compose किया था।

क्यों देंखे ये फ़िल्म ?

एक Suspense Thriller फ़िल्म के शौकीन है और Serial Killer वाली फिल्में देखना पसंद करते हैं, Dulquer Salmaan को Romantic + Serial Killer के किरदार में बवाल Acting को देखना चाहते हैं तो ये फ़िल्म आपके लिए है।

लंबी दूरी की है तैयारी, Zao संग करें सवारी, फायदों के साथ यात्रा बनायें आसान

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आज के दौर में यात्राओं का दौर धीरे धीरे बढ़ा है, जहाँ हर एक व्यक्ति हफ्ते दर हफ्ते अपनी यात्राओं का प्लान रखता है। वहीं इस दौरान हमें कई बार खर्चों के चलते या फिर यात्रा के सुविधाजनक न होने के चलते इससे हाथ खींचने पड़ते हैं, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा क्योंकि अब प्रदेश की राजधानी लखनऊ से यात्राओं को सरल, सुगम, सुविधानजक बनाने की शुरुआत हो चुकी है।

दूसरी ओर यह सुविधा अन्य की अपेक्षा पैसे की बचत करने वाली और आपको अनेक झंझटों से बचाने वाली है, जहाँ आपको 1 किलोमीटर के लिये मात्र 1 रुपये का खर्च ही करना पड़ेगा, जिससे आप पैसे की अधिक बचत कर पायेंगे और यह यात्रा आपके लिये सुगम और सुरक्षित भी होगी। अधिकतर हम देखते होंगे कि हम यात्रा का प्लान तो बखूबी तैयार कर लेते हैं लेकिन कई समस्याओं के आगे आने के चलते हमें उसे कैंसल करना पड़ता है। जिनमें से ड्राइवर का ना आना, ड्राइवर का न मिलना, अधिक पैसों का लगना, यात्रा की सुगमता आदि। वहीं अब आपकी सारी समस्याएँ जल्द ही खत्म होने वाली हैं क्योंकि Zao Cabs के जरिये आपकी यात्रा पहले से बेहतर होने वाली है, आईये जानते हैं इसकी विस्तृत जानकारी।

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कार पुलिंग आमजन के बीच ऐसे करेगी काम-
कारपूलिंग एक आईडिया है कार सफर शेयर करने का जिसमें एक से अधिक व्यक्ति एक कार में सफर करते हैं. यानी यदि आप अपनी निजी कार ड्राइव करके किसी स्थान पर अकेले जा रहे हैं और खाली पड़ी सीट्स पर उसी स्थान पर जाने वाली कुछ सवारी बैठाते हैं जो बदले में आपको पैसे देती हैं, तो यह कारपूलिंग कहलाता है। Carpooling में एक ही वाहन में कई लोगों के एक साथ सफर करने पर प्रत्येक यात्री का यात्रा खर्च कम हो जाता है जैसे ईंधन खर्च, टोल भुगतान और साथ में ड्राइविंग के दौरान अकेलापन भी महसूस नहीं होता।

कारपूलिंग की अवधारणा यातायात की भीड़ और प्रदूषण को कम करने तक सीमित नहीं है। जब राइड-शेयरिंग की बात आती है तो इसकी व्यापक संभावना होती है। हां, जब आप कारपूल करते हैं, तो आप समान विचारधारा वाले लोगों के साथ यात्रा करते हैं, और इससे आपको अपने पेशेवर नेटवर्क का विस्तार करने में मदद मिलेगी। आप चलते-फिरते भी दोस्त बना सकते हैं, और अगर आप अभी-अभी किसी नए शहर में गए हैं, तो नए लोगों से बातचीत करना दिलचस्प होगा।

वहीं Zao Cabs के फाउंडर अभिषेक शर्मा ने इसके बारें में बतलाते हुये कहा कि इसे शुरू करने का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण को प्रदूषण से बचाना, लोगों के पैसे की बचत करना जहाँ इसके जरिये हम उन्हें किफायत दाम यानी 1 किलोमीटर के 1 रुपये के हिसाब से सुविधाएं देंगे। इसके साथ ही हम देखते होंगे कि आये दिन सड़क दुर्घटना में लोग अपनी जान गँवाते रहते हैं, इसके जरिये सड़क दुर्घटनाओं को थामा जा सकेगा, क्योंकि जितनी कम गाड़ियां सड़कों पर होगी उतनी ही दुर्घटनाओं में कमी आयेगी।

कार पुलिंग के आमजन को यह हैं बेहतर फायदे-

पैसों की बचत होती है – carpooling से ईंधन और टोल का खर्चा साझा हो जाता है, जो आपके खर्च को 90% तक या उससे ज्यादा कम कर देता है जितने ज्यादा व्यक्ति कार में सफर करेंगे, आप उतनी ही ज्यादा बचत कर पाएंगे. कारपूलिंग आर्थिक रूप से समाज के लिए फायदेमंद है। इससे आप केवल अपनी ही बचत नहीं बल्कि उस खर्चे को भी कम कर रहे होते हैं जो हमारे द्वारा नए सड़क निर्माण, सड़क रखरखाव और प्रदूषण कम करने जैसे कार्यों के लिए दिया जाता है।
पर्यावरण को फायदा पहुंचता है- जितना ज्यादा इस्तेमाल carpooling का होगा सड़कों पर ट्रैफिक की उतनी ही कम भीड़ होगी, जिससे पर्यावरण प्रदूषण कम होगा।


सफर सुविधाजनक होता है – कारपूलिंग में अकेले ड्राइविंग की तुलना में कम तनाव के साथ और साहचर्य के अतिरिक्त बोनस के साथ आने-जाने की सुविधा मिलती है। इसके साथ ही कारपूलिंग के दौरान नए दोस्त बनते हैं, जहाँ आप नए-नए लोगों से परिचित होते हैं जो एक अच्छा तरीका है नए दोस्त बनाने का।
इसके साथ व्हीकल की लाइफ बढ़ती है- शेयर ड्राइविंग से आपका वाहन कम चलता है जिससे वाहन की लाइफ बढ़ती है। वहीं इसके जरिये ट्रैफिक कम होता है जब तीन लोग carpool कर रहे होते हैं तो यहां रोड़ पर दो वाहन कम हो जाते हैं।

इन जगहों पर है सेवा उपलब्ध-
यह सेवा उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में मौजूद है।

घर बैठे कैसे आसानी से ऐसे उठायें इसका लाभ-
आप ZAO Carpool app का इस्तेमाल कर सकते हैं. इस app का इस्तेमाल करने के लिए आपको इस पर अपनी प्रोफाइल बनानी होती है और फिर आप इसमें अपना यात्रा कार्यक्रम और गंतव्य शामिल कर सकते हैं. इसके बाद आप carpool के लिए उसी गंतव्य तक जाने वाले यात्रियों से संपर्क कर सकते हैं।

पर्यावरण को लाभ पहुँचाएगी ये सुविधा, जानें कैसे करेगी काम-
बता दें कि कारपूलिंग की अवधारणा यातायात की भीड़ और प्रदूषण कम करने पर मुख्य फोकस कर रही है। कारपूलिंग के जरिये ईंधन की लागत, टोल और ड्राइविंग का तनाव तो घटेगा ही साथ ही इससे वायु प्रदूषण, कार्बन उत्सर्जन, सड़कों पर यातायात की भीड़ और पार्किंग स्थानों को भी कम करेगा। जहाँ कारपूलिंग के जरिये सड़क में वाहनों की संख्या की कम होगी इसके साथ ही पर्यावरण प्रदूषण, ईंधन की खपत, सड़क पर दुर्घटनाएं आदि भी कम होगी।

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Lucknow: लघु फिल्म हुड़दंग की चारों तरफ चर्चा, जानें क्या है खास

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एक कलाकार की दृष्टि को हमेशा अलग माना जाता है, क्योंकि वह चाहे जिस क्षेत्र में हो लेकिन उसकी दृष्टि पैनी रहती है। ऐसी ही खूबियों से भरे गोरखपुर निवासी आलोक द्विवेदी खूब प्रशंसा बटोर रहे हैं, बता दें कि उनकी लघु फिल्म हुड़दंग जिसे केरल फिल्म समारोह में चयनित किया गया है।

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वहीं फिल्म को देखने के बाद उनकी फिल्म की खूब प्रशंसा हुई है। जानकारी के अनुसार आलोक मूलरूप से गोरखपुर के निवासी हैं, लेकिन लखनऊ से विशेष रूप से जुड़े हुये हैं।

वहीं सन 2013 में उन्होंने दृश्य कला में शैक्षणिक योग्यता शिल्प महाविद्यालय, लखनऊ विश्वविद्यालय से पूर्ण की है। वहीं पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने वीडियो इंस्टालेशन किया, जिसके बाद फिल्मों की ओर उनका रुझान बढ़ा। फिल्मों में रुझान बढ़ने के बाद उन्होंने मुंबई का रुख किया और अपने 6-7 वर्ष वहाँ खपाये। वहीं मौजूदा समय में वह फिल्म निर्माता, लेखक और दृश्य कलाकार के रूप में कार्य कर रहें हैं, जहाँ उन्होंने फिल्म निर्माता परोसित रॉय, अनिरुद्ध रॉय आदि के साथ विभिन्न वेब श्रृंखला और विज्ञापनों में सहायक निर्माता के तौर पर काम किया है।

वहीं आलोक द्विवेदी ने बतलाते हुये कहा कि अनुभवी लोंगो की मौजूदगी में फिल्म हुड़दंग का प्रदर्शन हुआ, जहाँ वरुण गोवर जैसी हस्तियां भी सम्मिलित थी। इन सभी ने लघु फिल्म की प्रशंसा की है, इसके साथ ही यह फिल्म , आइलैंड इंटनेशनल, बर्लिन फिल्म फेस्टिवल आदि में भी प्रदर्शन के लिये चयनित हुई है।

Raipur: गायत्री परिवार ने निकाली तिरंगा रैली, अधिकाधिक लोग हुये सम्मिलित

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अखिल विश्व गायत्री परिवार की रायपुर इकाई ने स्वतंत्रता दिवस के पूर्व आजादी के अमृत महोत्सव पर रायपुर शहर में राष्ट्रीय ध्वज को साथ मे लेकर बाइक रैली निकाली गई। गायत्री परिवार के जिला रायपुर के जिला समन्वयक श्री लच्छूराम निषाद ने बताया कि इस महोत्सव के दौरान देश के देश की आजादी में स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान, उनके बलिदान व देश के गौरवपूर्ण इतिहास एवं संकृति के विषय में नगरवासियों को जागरूक किया गया। साथ ही मिशन की सप्त सूत्रीय आंदोलन, वृक्ष गंगा अभियान, पर्यावरण का संरक्षण व संवर्धन एवं मोर रायपुर-स्वच्छ रायपुर के विषय मे भी संदेश दिया गया।

श्री निषाद ने बताया कि अखिल विश्व गायत्री परिवार के संस्थापक पं श्रीराम शर्मा आचार्य जी भी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रहे। राष्ट्र के परावलम्बी होने की पीड़ा भी उन्हें उतनी ही सताती थी जितनी कि गुरुसत्ता के आदेशानुसार तपकर सिद्धियों के उपार्जन की ललक उनके मन में थी । वर्ष 1926 से 1933 तक का समय उनका एक सक्रिय स्वयं सेवक- स्वतंत्रता सेनानी के रूप में बीता, जिसमें घरवालों के विरोध के बावजूद पैदल लम्बा रास्ता पार कर वे आगरा के उस शिविर में पहुँचे, जहाँ शिक्षण दिया जा रहा था, अनेकानेक मित्रों- सखाओं के साथ भूमिगत हो कार्य करते रहे तथा समय आने पर जेल भी गये। छह- छह माह की उन्हें कई बार जेल हुई। जेल में भी जेल के निरक्षर साथियों को शिक्षण देकर व स्वयं अँग्रेजी सीखकर लौटै।

आसनसोल जेल में वे पं. जवाहरलाल नेहरू की माता श्रीमती स्वरूपरानी नेहरू, श्री रफी अहमद किदवई, महामना मदनमोहन मालवीय जी, देवदास गाँधी जैसी हस्तियों के साथ रहे व वहाँ से एक मूलमंत्र सीखा जो मालवीय जी ने दिया था कि जन- जन की साझेदारी बढ़ाने के लिए हर व्यक्ति के अंशदान से, मुट्ठी फण्ड से रचनात्मक प्रवृत्तियाँ चलाना। स्वतंत्रता की लड़ाई के दौरान कुछ उग्र दौर भी आये, जिनमें शहीद भगतसिंह को फाँसी दिये जाने पर फैले जनआक्रोश के समय श्री अरविन्द के किशोर काल की क्रान्तिकारी स्थिति की तरह उनने भी वे कार्य किये, जिनसे आक्रान्ता शासकों प्रति असहयोग जाहिर होता था।

नमक आन्दोलन के दौरान वे आततायी शासकों के समक्ष झुके नहीं, वे मारते रहे परन्तु, समाधि स्थिति को प्राप्त राष्ट्र देवता के पुजारी को बेहोश होना स्वीकृत था पर आन्दोलन के दौरान उनने झण्डा छोड़ा नहीं जबकि, फिरंगी उन्हें पीटते रहे, झण्डा छीनने का प्रयास करते रहे। उन्होंने मुँह से झण्डा पकड़ लिया, गिर पड़े, बेहोश हो गये पर झण्डे का टुकड़ा चिकित्सकों द्वारा दाँतों में भींचे गये टुकड़े के रूप में जब निकाला गया तब सब उनकी सहनशक्ति देखकर आश्चर्यचकित रह गये । उन्हें तब से ही आजादी के मतवाले उन्मत्त श्रीराम मत्त नाम मिला। अभी भी भी आगरा में उनके साथ रहे या उनसे कुछ सीख लिए अगणित व्यक्ति उन्हें मत्त जी नाम से ही जानते हैं।

लगानबन्दी के आकड़े एकत्र करने के लिए उन्होंने पूरे आगरा जिले का दौरा किया व उनके द्वारा प्रस्तुत वे आँकड़े तत्कालीन संयुक्त प्रान्त के मुख्यमंत्री श्री गोविन्द वल्लभ पंत द्वार गाँधी जी के समक्ष पेश किये गये । बापू ने अपनी प्रशस्ति के साथ वे प्रामाणिक आँकड़े ब्रिटिश पार्लियामेन्ट भेजे, इसी आधार पर पूरे संयुक्त प्रान्त के लगान माफी के आदेश प्रसारित हुए । कभी जिनने अपनी इस लड़ाई के बदले कुछ न चाहा, उन्हें सरकार ने अपने प्रतिनिधि के साथ सारी सुविधाएँ व पेंशन दिया, जिसे उनने प्रधानमंत्री राहत फण्ड के नाम कर दी । वैरागी जीवन का, सच्चे राष्ट्र संत होने का इससे बड़ा प्रमाण क्या हो सकता है? निषाद ने बताया कि गायत्री परिवार द्वारा अनेक प्रकार के रचनात्मक कार्यक्रम के आयोजन से सामाजिक और संस्कृतिक उत्थान के कार्य किये जाते है। आने वाले समय मे हमारा देश विश्व का सिरमौर और विश्वगुरु बनेगा ।

इस रैली को छत्तीसगढ़ की ज़ोन समन्वयक आदर्श वर्मा दीदी, प्रमुख ट्रस्टी श्याम बैस, प्रकाश दावड़ा, सुखदेव देवांगन , हनुमान प्रसाद अग्रवाल, उप ज़ोन समन्वयक सी पी साहू, जिला संगठन के सदस्यों ने गायत्री शक्ति पीठ समता कॉलोनी से तिरंगा दिखाकर रवाना किया, जो अग्रसेन चौक, आमापारा,कंकाली तालाब, बूढ़ा तालाब, पुलिस लाइन, टिकरा पारा, पचपेड़ी नाका, रामकृष्ण हॉस्पिटल होते हुए गायत्री शक्तिपीठ दावड़ा कॉलोनी पहुची। इस रैली में गायत्री परिवार के युवा कार्यकर्ता व वरिष्ठ कार्यकर्ता सहित अनेक परिजन शामिल हुए। गायत्री परिवार रायपुर द्वारा स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रातः काल गायत्री शक्ति पीठ रायपुर में ध्वजारोहण का कार्यक्रम भी आयोजित है।

UP: फोटोग्राफी वर्कशॉप का हुआ आयोजन, छात्रों ने सीखी कैमरे की बारीकियां

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बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय में फोटोग्राफी वर्कशॉप का आयोजन हुआ, यह आयोजन विश्विद्यालय के मीडिया सेंटर के तत्वावधान में आयोजित हुआ।

बता दें कि इस वर्कशॉप को फुजी फिल्म और विश्विद्यालय के मीडिया सेंटर द्वारा छात्रों की कैमरे की समझ बढ़ाने के लिये किया गया था, वहीं इस वर्कशॉप के दौरान फुजी फ़िल्म के मेंटर रोहित अदलाखा ने छात्रों को कैमरे के गुण, उसको चलाने की बारीकियां भी बताई।

वहीं इस दौरान छात्रों और वहाँ उपस्थित लोंगो ने मेंटर से अपने सवाल भी पूछे और फोटोग्राफी, कैमरे से जुड़े अपने संशयों को भी दूर किया। इस दौरान मीडिया स्कूल के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ गोपाल सिंह, प्रोफेसर डॉ रचना गंगवार, प्रोफेसर डॉ अरविंद कुमार सिंह और फुजी फिल्म की पूरी टीम उपस्थित रही।

Rangbaaz Season 3 Review: बिहार की राजनीति की कहानी कहती है ये वेब सीरीज

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Review by : Abhinandan Kumar

वो पूछते हैं कि हम कौन है ग़ालिब… तुम बतलाओ की हम बतलाए क्या…

One Word Review : बवाल

बिहार से हैं… और बिहार की राजनीति, बिहार के बाहुबली लोगों में दिलचस्पी है… तो ये Web Series देख कर अपनी ज़िंदगी को तृप्त कर लीजिए।

1990 से 2010 तक बिहार और सिवान की राजनीति, इन सब के बीच सबसे बड़े बाहुबली “मोहम्मद शहाबुद्दीन” का नाम, पत्रकार “राजदेव रंजन” का मर्डर, “लालू यादव”, “कुर्सी कुमार”, लाल सलाम, JNU, चारा घोटाला, “शहाबुद्दीन” का मुख्यमंत्री ना बन पाने के पीछे की कहानी, राजनीति और बाहुबली के बीच दोस्ती, “शहाबुद्दीन” अच्छा या बुरा ? “शहाबुद्दीन” खुद मरा या किसी ने मार दिया ? इन सब का जवाब जानना है… तो इस Web Series के दरवाजे पर जाना पड़ेगा।

Review में लिखने के लिए बहुत सारी चीजें है… बाकी फिलहाल कुछ फिल्मी भाषा मे बोले तो… Director और Editor की तारीफ में ⭐⭐⭐⭐⭐ Dialogue Writter को अलग से सलाम बनता है, Screenplay आपको पूरी तरह कहानी से बांध कर रखता है।

अंत मे “शहाबुद्दीन” का ही एक Dialogue याद आरहा है… हुनर तो कई हांथो में होता है, लेकिन यहाँ इज्जत सिर्फ उसी की होती है, जिसके पास शक्ति है।

Ranbir Kapoor से ज्यादा, Sanjay Dutt की लगती है फ़िल्म !! Shamshera Film Review

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ह तो भइया… कुल मिला कर बात ये है कि Yash Raj Films के पास पैसा बहुत है, लेकिन कहानी नही… Film में Wow Factor की भरपूर कमी है… कई बार कहानी अपने मूल विषय से भटक जाती है… ये फ़िल्म Ranbir Kapoor से ज्यादा, Sanjay Dutt की लगती है।

Story :-

फ़िल्म की पूरी कहानी “शमशेरा” यानी कि Ranbir Kapoor” के आस पास घूमती है। कहानी के शुरू में ऐसा बताया जाता है कि मुगलों के शासन में “खमेरा” जाति के लोगों पर अत्याचार होने के कारण, उन्हें अपना घर-बार सब छोड़कर जाना पड़ता है। इसके बाद अंग्रेजों का जेलर “शुद्ध सिंह” यानी कि संजय दत्त “शमशेरा” और उनकी जाति के लोगो को धोखा दे कर बन्दी बना लेता है।
आगे “शमशेरा” अपनी जाति के लोगो को जेलर “शुद्ध सिंह” से कैसे बचा पाता है ? फ़िल्म खत्म होते ये आपको पता चल जाएगा।

शुरू में कहानी बहुत धीमी है। शुरुवाती कुछ Scene अंदर से जोश जगाते हैं… लेकिन फिर सब कुछ धीमा पर जाता है। फ़िल्म की कहानी कई बार अपने मूल विषय से भटक जाती है। कमजोर कहानी की वजह से कई बार दर्शक कहानी से खुद को जोड़ नही पाते… और हॉल में बैठ कर फ़िल्म देखने की बजाए फ़ोन चलाते नज़र आते है।

Actor Performance :-

Film की जान “संजू बाबा” हैं… पर्दे पर जितनी बार “संजय दत्त” आते है… कमाल कर के जाते है। Ranbir Kapoor ने काम अच्छा किया है… हालांकि इस किरदार के लिए Ranbir Kapoor कई बार कमजोर लगते है… दर्शको का ताली संजय दत्त लूट ले जाते है। “Vaani Kapoor” का होना ना होना बराबर है… रोनित रॉय का किरदार छोटा है…जिस वजह से दर्शकों के बीच वो अपनी छाप नही छोड़ पाते। Saurabh Sukhla का काम बहुत अच्छा है।

Direction :-

Film के डायरेक्टर “कारण मल्होत्रा”… इसके पहले करण मल्होत्रा ने “अग्निपथ”, “ब्रदर्स” और बहुत सारी फिल्मों को डायरेक्ट किया है। बात इस फ़िल्म की करें तो… कुछ जगह Direction काफी कमजोर लगता है। फ़िल्म में Wow Factor की भरपूर कमी है। दर्शक को हर Scene में बांधने में Director नाकामयाब दिखाई पड़े हैं। कुछ scene को बहुत शानदार तरीके से फ़िल्माया गया है, जहाँ वाकई में डायरेक्टर की तारीफ बनती है।

Cinematography :-

कैमरा वर्क की बात करे तो, यहाँ पर फ़िल्म को 10 में 10 अंक मिलते है। Establishment शॉर्ट काफी बेहतरीन तरीके फ़िल्माया गया है। Action Sequence में Cinematographer का काम देखने लायक है।

अब थोड़ा Filmy भाषा मे बात करें तो :- Screenplay कुछ जगह बहुत शानदार है… Dialogue ऐसा कुछ है नही जो दिलों दिमाग पर चढ़ सके… Action Sequence को अच्छा फ़िल्माया गया है… Music कुछ जगह आपको बेमतलब का लग सकता है… लेकिन Ticket के पैसे लगे है तो Vaani Kapoor को देखना बनता है।

क्यों देखें ये फ़िल्म :-

Action फिल्मो की शोक रखते हैं… और अगर “संजय दत्त” को इस शानदार किरदार में देखना चाहते हैं… तो ये फ़िल्म आपके लिए है।

अंततः यही कहेंगें, की Ranbir Kapoor की अगली फिल्म का इंतज़ार करें… ये वाली तो बस 3, 4 दिन की मेहमान है… अगले हफ्ते फिर से South वाले आरहे हैं Kiccha Bhai के साथ Vikrant Rona ले कर Bollywood की खटिया खड़ी करने।

रायपुर को हरा भरा बनाने के लिए गायत्री परिवार द्वारा पौधरोपण के लिए किया गया पौधों का वितरण

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गायत्री तीर्थ शान्तिकुंज हरिद्वार के मार्गदर्शन एवं निर्देशन में अपने अपने क्षेत्रों को हरा भरा रखने, पर्यावरण संरक्षण व भावी पीढ़ी को शुद्ध ऑक्सिजन मिल सके इसके लिए प्रतिवर्ष जुलाई से अगस्त तक वृक्षारोपण माह का आयोजन किया जाता है।

इसी कड़ी में रायपुर शहर को हरा-भरा बनाने के लिये गायत्री परिवार रायपुर के युवा प्रकोष्ठ के द्वारा रविवार को देवेंद्र नगर में पौधा वितरण का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत पौधों का पूजन एवं रक्षासूत्र बांधकर मंत्रोच्चारण के साथ एक फलदार एवं एक छायादार पौधों का रोपण कर किया गया।

पौधों के वितरण के साथ स्थानीय निवासियों से इन पौधों को अपने अपने घरों/प्रतिष्ठानों के आस पास लगाने का निवेदन किया गया साथ ही उपस्थित लोगों से इसकी सुरक्षा एवं देखभाल करने का संकल्प भी लिया गया।

गायत्री परिवार रायपुर के युवा प्रकोष्ठ प्रभारी श्री आशीष राय ने बताया कि आज के समय में जितनी तीव्र गति से इंफ्रास्ट्रक्चर का विकाश हो रहा है उतनी ही तीव्रता से हरे भरे वृक्षो का नष्ट भी किया जा रहा है। ग्लोबल वार्मिंग की समस्या का मुख्य कारण में एक कारण भी यही है।

ग्लोबल वार्मिंग से बचाव के लिए वृक्षारोपण अति आवश्यक है। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण एवं नागरिकों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता लाना है ताकि हमारे आसपास का वातावरण स्वच्छ एवं शुद्ध रहे साथ ही आने वाली पीढ़ी को भी प्रदूषण मुक्त शुद्ध ऑक्सीजन मिलता रहे एवं उन्हें संकट से बचाया जा सके।

इसी उद्देश्य से आज नीम, बरगद, पीपल, आंवला, मीठा नीम, मोगरा पौधे का वितरण देवेंद्र नगर में घर घर जाकर किया गया। देवेन्द्र नगर सोसायटी के सदस्यों ने कहा कि गायत्री परिवार के द्वारा चलाया जा रहा वृक्षारोपण अभियान निश्चित रुप से रायपुर को एवं पूरे प्रदेश को हरा भरा बनाने में उपयोगी सिद्ध होगा।

इस अवसर पर गायत्री परिवार युवा प्रकोष्ठ रायपुर से दुर्गेश्वरी निषाद, हंसराम साहू, सरिता साहू, सन्नू सांखला एवं देवेन्द्र नगर सोसाइटी के सदस्य उपस्थित रहे। गायत्री परिवार द्वारा आगे भी यह कार्यक्रम जारी रहेगा।

असम बन सकता है देश के विकास का इंजन, लखनऊ में हुई गोष्ठी

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यूपी की राजधानी लखनऊ के आशियाना स्थित कैलाश ऑडिटोरियम में मंगलवार को गेल (GAIL) के तत्वाधान में ग्लोबल नॉर्थ ईस्ट सस्टेनेबिलिटी इंडियन समिट का आयोजन हुआ। जिसमें मुख्य रुप से असम प्रान्त की संस्कृति, परिधान, कृषि परिवेश आदि को प्रदर्शित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रगान एवं गणेश वंदना से की गई, इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर प्रवीण अवस्थी (प्रतिनिधि, केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर) उपस्थित रहे।

इस दौरान प्रवीण अवस्थी ने कहा कि पुराने समय का प्राग्ज्योतिषपुर आज असम के नाम से जाना जाता है वहीं, असम पूर्व की ज्योति के नाम से विख्यात है। दूसरी तरफ यह प्रदेश वन प्रदेशों, नदियों, झरनों और सुंदर पर्वतमालाओं से भरा हुआ है। यहां जितनी सुंदरता है, अब उतनी सुंदरता से इसे संवारने का कार्य मौजूदा केंद्र सरकार कर रही है। अभी हाल में ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम को कई सौगातें सौंपी हैं। जिनमें से धुबरी फूलबारी पुल, बहुस्तरीय कैंसर अस्पताल, अमृत सरोवर आदि प्रमुख हैं।

वहीं, असम में वह सभी संभावनाएं मौजूद हैं, जो एक दिन देश के विकास का इंजन बन सकता है, इस वजह से यहां सरकार ने अपना ध्यान अधिक आकृष्ठ किया हुआ है। असम राज्य की प्रमुख नदी ब्रह्मपुत्र (तिब्बत की सांगपी) है, जो लगभग पूर्व पश्चिम में प्रवाहित होती हुई धुबरी के निकट बांग्लादेश में प्रविष्ट हो जाती है। प्रवाह क्षेत्र के कम ढलवाँ होने के कारण नदी शाखाओं में विभक्त हो जाती है तथा नदीस्थित द्वीपों का निर्माण करती है, जिनमें माजुली (129 वर्ग किमी) विश्व का सबसे बड़ा नदी स्थित द्वीप है।

वर्षाकाल में नदी का जलमार्ग कहीं कहीं 8 किमी चौड़ा हो जाता है तथा झील जैसा प्रतीत होता है। इस नदी की 35 प्रमुख सहायक नदियाँ हैं. सुवंसिरी, भरेली, धनसिरी, पगलडिया, मानस तथा संकाश आदि दाहिनी ओर से तथा लोहित, नवदिहिंग, बूढ़ी दिहिंग, दिसांग, कपिली, दिगारू आदि बाई ओर से मिलने वाली प्रमुख नदियाँ हैं।