Monday, December 5, 2022

असम बन सकता है देश के विकास का इंजन, लखनऊ में हुई गोष्ठी

यूपी की राजधानी लखनऊ के आशियाना स्थित कैलाश ऑडिटोरियम में मंगलवार को गेल (GAIL) के तत्वाधान में ग्लोबल नॉर्थ ईस्ट सस्टेनेबिलिटी इंडियन समिट का आयोजन हुआ। जिसमें मुख्य रुप से असम प्रान्त की संस्कृति, परिधान, कृषि परिवेश आदि को प्रदर्शित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रगान एवं गणेश वंदना से की गई, इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर प्रवीण अवस्थी (प्रतिनिधि, केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर) उपस्थित रहे।

इस दौरान प्रवीण अवस्थी ने कहा कि पुराने समय का प्राग्ज्योतिषपुर आज असम के नाम से जाना जाता है वहीं, असम पूर्व की ज्योति के नाम से विख्यात है। दूसरी तरफ यह प्रदेश वन प्रदेशों, नदियों, झरनों और सुंदर पर्वतमालाओं से भरा हुआ है। यहां जितनी सुंदरता है, अब उतनी सुंदरता से इसे संवारने का कार्य मौजूदा केंद्र सरकार कर रही है। अभी हाल में ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम को कई सौगातें सौंपी हैं। जिनमें से धुबरी फूलबारी पुल, बहुस्तरीय कैंसर अस्पताल, अमृत सरोवर आदि प्रमुख हैं।

वहीं, असम में वह सभी संभावनाएं मौजूद हैं, जो एक दिन देश के विकास का इंजन बन सकता है, इस वजह से यहां सरकार ने अपना ध्यान अधिक आकृष्ठ किया हुआ है। असम राज्य की प्रमुख नदी ब्रह्मपुत्र (तिब्बत की सांगपी) है, जो लगभग पूर्व पश्चिम में प्रवाहित होती हुई धुबरी के निकट बांग्लादेश में प्रविष्ट हो जाती है। प्रवाह क्षेत्र के कम ढलवाँ होने के कारण नदी शाखाओं में विभक्त हो जाती है तथा नदीस्थित द्वीपों का निर्माण करती है, जिनमें माजुली (129 वर्ग किमी) विश्व का सबसे बड़ा नदी स्थित द्वीप है।

वर्षाकाल में नदी का जलमार्ग कहीं कहीं 8 किमी चौड़ा हो जाता है तथा झील जैसा प्रतीत होता है। इस नदी की 35 प्रमुख सहायक नदियाँ हैं. सुवंसिरी, भरेली, धनसिरी, पगलडिया, मानस तथा संकाश आदि दाहिनी ओर से तथा लोहित, नवदिहिंग, बूढ़ी दिहिंग, दिसांग, कपिली, दिगारू आदि बाई ओर से मिलने वाली प्रमुख नदियाँ हैं।

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