Saturday, January 22, 2022
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BJP ने गाय को ‘छुट्टा जानवर’ में बदल दिया- नसीमुद्दीन सिद्दीकी

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प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मीडिया एवं कम्युनिकेशन विभाग के चेयरमैन नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कहा है कि भारतीय जनता पार्टी ने गाय पर सिर्फ राजनीति की है और इसकी वजह से गौवंश को पूरे प्रदेश में ‘छुट्टा जानवर’ की श्रेणी में ला खड़ा किया है। उन्होंने कहा है कि हालात यह हैं कि एक ओर गौवंश को कथित गौशालाओं में भूखा प्यासा रखकर उनकी हत्या की जा रही है दूसरी ओर खुले में घूमते पशुओं की वजह से पूरे प्रदेश के किसान परेशान हो गए हैं।

स्थिति यह हो गई है कि किसान खेती छोड़ने पर भी विचार करने लगा है। नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कहा है कि उत्तर प्रदेश में बीते 5 साल में फसलों को उगाने में किसानों का जितना श्रम और पैसा लगा है, उससे कहीं ज्यादा पैसा और श्रम खेतों में फसलों की रखवाली करते हुए बीत रहा है। बीते पांच साल से पूरे प्रदेश के किसान कड़ाके की सर्दी, चिलचिलाती धूप और गरजते बादलों के बीच रात-रातभर जगकर फसल की रखवाली करने को मजबूर हो रहे हैं।

बावजूद इसके छुट्टा जानवरों से फसल सुरक्षित नहीं है। सिद्दीकी ने कहा कि प्रदेश में 4-5 लाख छुट्टा पशु सड़कों पर हैं, जिनकी देखभाल कोई नहीं कर रहा है। छुट्टा जानवरों के आतंक से सिर्फ किसान ही नहीं परेशान हैं बल्कि राज्य में ग्रामीण सड़कें, गांवों में गली, चौक-चौराह तक छुट्टा जानवरों के आतंक से का शिकार हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के अनेक हिस्सों से समय-समय पर गोशालाओं में रखरखाव में कमी और पशुओं के बीमार होने और मरने की खबरें आती रही हैं।

बांदा, उन्नाव, अमेठी, हमीरपुर, कन्नौज जैसे उनके जिलों में पशु शेड न होने, पशुओं के भीगने यहां तक कि पशुओं को जिंदा दफनाने तक की घटनाएं सामने आती रही हैं। लेकिन कोरे वादों और जांच के झांसे के अलावा सरकार ने न तो कहीं कोई ठोस कदम उठाया और न ही जिम्मेदारों पर कार्रवाई की गई। सिद्दीकी ने कहा कि सरकार द्वारा पशुओं के रखरखाव के लिए, जितनी राशि खर्च की जाती है, वह पशुओं तक पहुंचने की बजाय योगी सरकार के अधिकारियों और भाजपा के कार्यकर्ताओं के बीच बंटती रही है।

आज छुट्टा जानवरों के आतंक से परेशान प्रदेश का किसान खेतों की तारबंदी करने पर मजबूर हैं। एक बीघे की तारबंदी का खर्च 2-3 हजार रुपये के आसपास आता है, जो फसल उत्पादन की लागत से अलग है। बड़े किसानों को तो थोड़ी आसानी है लेकिन छोटी जोत के गरीब किसानों के पास इतना पैसा नहीं है कि वह अपने खेतों की तारबंदी कर सकें।

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