GOVARDHAN- प्रभु की भक्ति से मिली शक्ति,विधवा आश्रम की महिलाओं की ज़िंदगी में ख़ुशबू बिखेर रही अगरबत्ती

ख्वाब टूटे हैं मगर,हौसले अभी जिंदा हैं। मैं वह नारी हूं,जिससे मुश्किलें भी शर्मिंदा हैं। जी हां हम बात कर रहे हैं राधाकुंड के मैत्री विधवा आश्रम में रह रही निराश्रित विधवा महिलाओं की। विधवा महिला को किसी के पति ने छोड़ा तो किसी के बेटे ने घर से निकाल दिया। महिलाओं के आगे तमाम मुश्किलें आईं लेकिन सभी मुश्किलों ने भी घुटने टेक दिए हैं। राधाकुंड की राधानगर कॉलोनी के मैत्री विधवा आश्रम में रह रही 250 विधवा महिलाओं की कहानी कुछ इसी प्रकार हैं। वहीं कूच विहार जिला पश्चिम बंगाल की रहने वाली विधवा महिला पिर्मलादासी के पति मनमोहन ने साथ छोड़ दिया। महिला पर एक बेटी थी जिसका औऱ अपना पालन पोषण करना मुश्किल हो गया। मेहनत मजदूरी कर पेट भर रही थी। बेटी बड़ी हो गई उसकी शादी घर जमीन बेचकर कर दी इसके बाद महिला को सहारा देने वाला कोई नहीं रहा। दर-दर की ठोकरें खाते हुए महिला ब्रज नगरी में पहुँची यहां भीख मांग कर पेट भरने लगी। कुछ दिन बाद इस महिला की मुलाकात मैत्री विधवा आश्रम के मैनेजर संतोष कुमार से हुई। संतोष कुमार महिला को विधवा आश्रम ले आये, महिला मैत्री विधवा आश्रम में रहकर प्रभु का भजन संकीर्तन, पोशाक, सिलाई और अगरबत्ती बनाने लगी हैं। वहीं शोभादासी ने आप बीती घटना सुनाई तो आँखे नम हो गई। शोभादासी के जन्म लेने बाद ही माता पिता की मृत्यु हो गई और वह अनाथ हो गई। पड़ोसियों ने 10 साल तक पालन पोषण किया उसके बाद बेरहम दिल होकर जुल्म ढाने लगे तो शोभादासी पश्चिम बंगाल से जान बचाकर निकल आई और एक बाबा ने उन्हें ब्रज नगरी राधाकुंड में लाकर छोड़ दिया। करीब 30 साल से राधाकुंड में रहकर प्रभु भजन, संकीर्तन कर मालाएं बना रहीं है। पोशाक सिलाई, अगरवत्ती, बनाकर जीवन यापन कर रही है। अब राधाकुंड के विधवा मैत्री आश्रम में 250 विधवा महिलाएं रहकर दुःख दर्द भुलाकर खुशी बांटने को हर रोज भजन संकीर्तन कर प्रभु की भक्ति का आंनद ले रही हैं। आश्रम मैनेजर संतोष कुमार ने बताया कि मैत्री विधवा आश्रम में 250 से अधिक विधवा माताएं रह रही हैं, इनके खाने पीने व रहने की उत्तम व्यवस्था है। माताओं को दूध,फल, हरी सब्जी,और हर कमरा में कूलर पंखा और हलमारी व साफ सफाई की विशेष व्यवस्था है। विधवा माताओं की सेवा के लिए कर्मचारी भी लगा रखे हैं।

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