Wednesday, January 19, 2022
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Hamirpur: ग्रामीण इलाके से संघर्ष करके खड़ी की अरबों की कंपनी, 24 हजार महिलाओं का बनी सहारा

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कुछ करने का हौसला हो तो जगह आपके लिये मैटर ही नहीं करती है, बस लक्ष्य पाने का हौसला जुनूनी होना चाहिये। ऐसी ही कहानी सामने आयी है UP के हमीरपुर से, जहाँ ग्रामीणांचल से निकल दो महिलाओं ने अरबों की कंपनी खड़ी कर दी, वहीं इसके साथ ही उन्होंने 24 हजार महिलाओं को सुगमता के साथ रोजगार भी उपलब्ध कराया है। हमीरपुर जनपद के कुड़ौरा गाँव की निवासी अंजनी जिनकी शिक्षा हाईस्कूल पास और उमाकांति जोकि BTC का प्रशिक्षण प्राप्त कर चुकी है, दोनों महिलाओं ने अपनी मेहनत के दम बलिनी दुग्ध उत्पादन कंपनी को शीर्ष पर पहुँचाया है।

जानकारी के अनुसार दोनों महिलाओं के प्रयास से बुंदेलखंड में फेल चल रही दुग्ध उत्पादन समितियों के लिये बलिनी दुग्ध उत्पादन के लिये नयी समितियां बनीं, इसके साथ ही इसमें हजारों की संख्या में महिलाओं को जोड़ा गया, जिससे फेल पड़ी इन समितियों को एक नई जान दोनों महिलाओं की मेहनत के बल पर मिल गयी और देखते ही देखते दो महीनों में यह कंपनी दो अरब की कंपनी बन गयी। आपको बता दें कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) और नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड नई दिल्ली के सहयोग से बलिनी दुग्ध कंपनी की शुरूआत की गयी, इसकी शुरुआत सन 2019 में Bundelkhand के पाँच जिलों हमीरपुर, बाँदा, झाँसी, जालौन और चित्रकूट से की गयी।

NRLM के जिला प्रबंधक प्रशांत मिश्रा ने इसके बारे में जानकारी देते हुये बताया कि दो साल के अंदर यह कंपनी दो अरब रुपये जुटा चुकी है, इसमें बोर्ड ऑफ डायरेक्टर अंजनी और उमाकांति को बनाया गया, जिनकी अथक मेहनत और मजबूत प्रयासों के दम पर यह संभव हो पाया है। दोनों महिलाओं ने अपने जिले के साथ साथ दूसरे जिले की महिलाओं को स्वयं सहायता समूह की मदद से इसमें जोड़ा, जिससे इसमें जुड़ी महिलाओं को भी आर्थिक सबल मिला और कंपनी भी दिनों दिन मजबूत होती गयी।

दोनों महिलाओं ने इसके बाबत बातचीत करते हुये बताया कि Bundelkhand में रोजगार की समस्या से लोंगो का पलायन एक बड़ी समस्या है, वहीं इसके जरिये करीब 613 गाँवो की 24 हजार महिलाओं को इससे जोड़ करके आत्मनिर्भर बनाया गया है। उन्होंने आगे बताया कि महिलाएं बलिनी के नाम से घी भी बनाती है, साथ ही दूध मदर डेयरी भी भेजा जाता है।

दूसरी तरफ संचालित कंपनी की ओर से Bundelkhand के सातों जिलों में एक अरब 88 करोड़ रुपये पशुपालन कर रही स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को बाँटा गया है, इसके साथ ही यहाँ 65 हजार 213 लीटर दूध संग्रह किया जा रहा है। इसके साथ ही हमीरपुर के ही राठ और पौथिया में 10 हजार लीटर की बल्क मिल्क कलेक्शन यूनिट स्थापित की गयी हैं।

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