ट्रम्प के H-1B वीजा पर रोक लगाने पर बोले मोदी, कहा- दूर की सोच अपनाए !

pm modi says us should have balanced and farsighted perspective of skilled professi
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के एच1बी वीजा में कटौती के रुख पर नरेंद्र मोदी ने उन्हें संतुलित रवैया रखने की बात कही है। उन्होंने कहा कि स्किल्ड प्रोफेशनल्स की आवाजाही पर अमेरिका दूर की सोच अपनाए। एच1बी वीजा में कटौती का भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स पर सबसे ज्यादा असर होगा।

क्या बोले मोदी ?

26 अमेरिकी सांसदों के एक डेलिगेशन का स्वागत करते हुए मोदी ने ट्रम्प के साथ हुई सकारात्मक बातचीत का भी जिक्र किया। PMO से जारी एक स्टेटमेंट के मुताबिक, मोदी ने उन क्षेत्रों पर भी बातचीत की, जिनमें दोनों देश साथ रहकर अच्छा काम कर सकते हैं। मोदी ने ये भी बताया कि अमेरिकी इकोनॉमी में भारतीयों का क्या योगदान है। उन्होंने बताया कि बीते ढाई साल में अमेरिका के साथ भारत का रिलेशन और मजबूत हुआ है। भारतीय आईटी इंडस्ट्री अमेरिका को 62% एक्सपोर्ट करती है। दूसरे नंबर पर यूरोपीय यूनियन का मार्केट है। जहां के लिए 28 फीसदी का एक्सपोर्ट होता है। H-1B वीजा पर नए नियमों के लिए कैलिफोर्निया की सांसद जो लॉफग्रेन ने ‘द हाई स्किल्ड इंटीग्रिटी एंड फेयरनेस एक्ट 2017’ बिल पेश किया था। 30 जनवरी को यूएस हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव में पेश किए गए बिल में प्रावधान है कि H-1B वीजा होल्डर्स को मिनिमम सैलरी 60 हजार डॉलर (40 लाख रु.) से दोगुनी बढ़ाकर 1.30 लाख डॉलर (करीब 88 लाख रु.) देनी होगी। बता दें कि H-1B वीजा पर भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स अमेरिका जाकर काम करते हैं। अगर ये बिल पास होता है तो ज्यादा सैलरी के प्रोविजन के चलते इन्फोसिस, विप्रो, टीसीएस जैसी भारतीय कंपनियों में काम कर रहे आईटी प्रोफेशनल्स की नौकरियों पर खतरा हो सकता है। वहीं, नए बिल के असर के चलते भारत की टॉप 5 आईटी कंपनियों मार्केट वैल्यू 50 हजार करोड़ तक गिर गई थी। इस बिल के तहत लोएस्ट पे कैटेगरी हटा दी गई है। यह कैटेगरी 1989 से लागू थी। इसी के तहत H-1B वीजा होल्डर्स को मिनिमम सैलरी 60 हजार डॉलर देने का नियम था।

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