World Water Day : जल संकट से त्रस्त हो जाएगा भारत, 16 करोड़ लोगों को नहीं मिल रहा पानी !

Water Will Be Drastically Reduced
Water Will Be Drastically Reduced

आज वर्ल्ड वॉटर डे है। माना जा रहा है कि 2050 तक भारत में पानी की बेहद कमी हो जाएगी। यूएन की एक हालिया रिपोर्ट में बताया गया है कि आने वाले समय में ब्राजील के साओ पाउलो और भारत के बेंगलुरु में पानी की किल्लत का खतरा सबसे ज्यादा होगा। इसे ‘जीरो डे’ नाम दिया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 16.3 करोड़ लोग साफ पानी के लिए तरस रहे हैं। पिछले साल ये आंकड़ा 6 करोड़ 30 लाख लोगों का था। आंकड़ा बढ़ने की वजह ये है कि वो लोग जिन्हें अपने घर तक पानी लाने में आधे घंटे लगते हैं, उन्हें यूएन के नियमों के मुताबिक पानी की पहुंच वाले लोगों की श्रेणी में शामिल नहीं किया जाता। इस पर जल संसाधन विभाग के प्रमुख एसके सरकार ने कहा कि पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में भूजल की बेहद कमी है। इन राज्यों में पानी की गंभीर स्थिति है। वहीं दक्षिण और मध्य भारत में 2050 तक नदियों में खराब जल की गुणवत्ता और बढ़ जाएगी।

25 साल हो गया इस दिन को मनाते हुए। मकसद यह था कि लोग इस दिवस से कुछ सीख लेकर अपने अस्तित्व के लिए पानी का अस्तित्व बरकरार रखेंगे। लेकिन फलां नहीं पानी बचा रहा तो हम क्यों बचाएं, इस सोच से मुक्ति पानी होगी। और सबको एक साथ इसके लिए आगे आना होगा। इस बार जल दिवस की थीम है नेचर फॉर वाटर यानी इस समस्या का ऐसा समाधान खोजना जो प्रकृति पर ही आधारित हो। तो आइए, प्रकृति की इस समस्या के लिए प्रकृति को ही ढाल बनाएं। पानी का मोल प्यास लगने पर ही मालूम पड़ता है। कोई भी तरल इसका विकल्प नहीं बन पाता। गला तर तभी होता है जब पानी की बूंदें हलक से नीचे उतरती हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह समस्या तब और बढ़ जाती है जब जमीन में खराब पदार्थों की डंपिंग होती है। खुले में शौच और गड्ढों में मल नष्ट करने से जमीन में बैक्टीरिया शामिल होते हैं। इससे भूजल में और ज्यादा प्रदूषित होता है।

Loading...