प्राइवेट स्कूलों पर कसा शिकंजा, ये होंगे बड़े बदलाव, डिप्टी सीएम ने दी जानकारी !

Reguation Of Fee Bill For Private School
Reguation Of Fee Bill For Private School

प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर नकेल कसने के लिए योगी सरकार ने मंगलवार को कैबिनेट में यूपी स्ववित्तपोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क निर्धारण) विधेयक के प्रस्ताव पर मुहर लगाई है। कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गयी है। आपको बतादें, प्राइवेट स्कूलों की फीस इतनी ज्यादा है की गरीब आदमी अपने बच्चो को वहां पढ़ा ही नहीं सकता।

डिप्टी सीएम ने दी जानकारी-

डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा ने बताया कि 12वीं तक के सभी बोर्डों से मान्यता प्राप्त स्कूल आयेंगे। इसमें प्री प्राइमरी और माइनॉरिटी स्कूल भी शामिल होंगे। उन्होंने बताया कि प्ले वे स्कूल इस नियम के तहत नहीं आयेंगे। साथ ही जिन स्कूलों की फीस 20 हजार तक है वह सभी स्कूल इसके दायरे में आयेंगे। सभी स्कूलों को सरकार को हर साल सत्र शुरू होने से 2 महीने पहले फीस स्ट्रक्चर बताना होगा। इसमें फीस स्ट्रक्चर के अलावा टीचर्स की सैलरी और बीते साल की फीस और अन्य खर्चों के बारे में बताना होगा। अब स्कूल एक साथ साल भर की फीस या दो साल की फीस इकठ्ठा नहीं ले पाएंगे। साथ ही स्कूल में अगर कोई कमर्शियल एक्टिविटी होती है तो वह स्कूल की आये में जुड़ेगा। यही नहीं फीस को दो हिस्सों में बांटा गया है। एक हिस्सा जिसे स्कूल कंपलसरी रूप में लेगा। जबकि दूसरा हिस्सा वह है जिसकी सेवायें लेने पर ही संबंधित फीस दी जाएगी। जैसे बच्चा कैंटीन का इस्तेमाल नहीं करता तो उसकी फीस नहीं देनी होगी।

अभिभावक जरूर पढ़ें-

शिकायत आती थी कि स्कूल ने एक साल में ही ड्रेस बदल दी लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। अगर ड्रेस में कोई बदलाव करना है तो मंडलायुक्त की अध्यक्षता में बनने वाली शुल्क नियामक समिति से मंजूरी लेनी होगी। साथ ही स्कूल अभिभावक को बाध्य नहीं कर सकते कि उन्हें कहां से किताब-कॉपी या ड्रेस लेनी है। सत्र चालू हो चुका है लेकिन अभिभावक यह न समझे की बढ़ी हुई फीस वापस नहीं हो सकती। अगर किसी स्कूल में तय मानकों से ज्यादा फीस बढ़ाई गयी है तो वह अभिभावक को वापस की जाएगी। नया एडमिशन लेने पर फीस निर्धारण के लिए स्कूल को अधिकार होंगे लेकिन यह फीस स्कूल की कुल आय-व्यय और विकास फंड की कुल राशि से अधिक नहीं होगी। जबकि पुराने छात्रों के लिए स्टाफ को दिए जा रहे सैलरी में बढ़ोत्तरी के अनुपात में फीस बढ़ाई जायेगी। यह बढ़ोत्तरी हर साल वार्षिक उपभोक्ता मूल्य सूचकांक 5% से अधिक नहीं होगी।

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