Thursday, September 29, 2022

Raipur: गायत्री परिवार ने निकाली तिरंगा रैली, अधिकाधिक लोग हुये सम्मिलित

अखिल विश्व गायत्री परिवार की रायपुर इकाई ने स्वतंत्रता दिवस के पूर्व आजादी के अमृत महोत्सव पर रायपुर शहर में राष्ट्रीय ध्वज को साथ मे लेकर बाइक रैली निकाली गई। गायत्री परिवार के जिला रायपुर के जिला समन्वयक श्री लच्छूराम निषाद ने बताया कि इस महोत्सव के दौरान देश के देश की आजादी में स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान, उनके बलिदान व देश के गौरवपूर्ण इतिहास एवं संकृति के विषय में नगरवासियों को जागरूक किया गया। साथ ही मिशन की सप्त सूत्रीय आंदोलन, वृक्ष गंगा अभियान, पर्यावरण का संरक्षण व संवर्धन एवं मोर रायपुर-स्वच्छ रायपुर के विषय मे भी संदेश दिया गया।

श्री निषाद ने बताया कि अखिल विश्व गायत्री परिवार के संस्थापक पं श्रीराम शर्मा आचार्य जी भी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रहे। राष्ट्र के परावलम्बी होने की पीड़ा भी उन्हें उतनी ही सताती थी जितनी कि गुरुसत्ता के आदेशानुसार तपकर सिद्धियों के उपार्जन की ललक उनके मन में थी । वर्ष 1926 से 1933 तक का समय उनका एक सक्रिय स्वयं सेवक- स्वतंत्रता सेनानी के रूप में बीता, जिसमें घरवालों के विरोध के बावजूद पैदल लम्बा रास्ता पार कर वे आगरा के उस शिविर में पहुँचे, जहाँ शिक्षण दिया जा रहा था, अनेकानेक मित्रों- सखाओं के साथ भूमिगत हो कार्य करते रहे तथा समय आने पर जेल भी गये। छह- छह माह की उन्हें कई बार जेल हुई। जेल में भी जेल के निरक्षर साथियों को शिक्षण देकर व स्वयं अँग्रेजी सीखकर लौटै।

आसनसोल जेल में वे पं. जवाहरलाल नेहरू की माता श्रीमती स्वरूपरानी नेहरू, श्री रफी अहमद किदवई, महामना मदनमोहन मालवीय जी, देवदास गाँधी जैसी हस्तियों के साथ रहे व वहाँ से एक मूलमंत्र सीखा जो मालवीय जी ने दिया था कि जन- जन की साझेदारी बढ़ाने के लिए हर व्यक्ति के अंशदान से, मुट्ठी फण्ड से रचनात्मक प्रवृत्तियाँ चलाना। स्वतंत्रता की लड़ाई के दौरान कुछ उग्र दौर भी आये, जिनमें शहीद भगतसिंह को फाँसी दिये जाने पर फैले जनआक्रोश के समय श्री अरविन्द के किशोर काल की क्रान्तिकारी स्थिति की तरह उनने भी वे कार्य किये, जिनसे आक्रान्ता शासकों प्रति असहयोग जाहिर होता था।

नमक आन्दोलन के दौरान वे आततायी शासकों के समक्ष झुके नहीं, वे मारते रहे परन्तु, समाधि स्थिति को प्राप्त राष्ट्र देवता के पुजारी को बेहोश होना स्वीकृत था पर आन्दोलन के दौरान उनने झण्डा छोड़ा नहीं जबकि, फिरंगी उन्हें पीटते रहे, झण्डा छीनने का प्रयास करते रहे। उन्होंने मुँह से झण्डा पकड़ लिया, गिर पड़े, बेहोश हो गये पर झण्डे का टुकड़ा चिकित्सकों द्वारा दाँतों में भींचे गये टुकड़े के रूप में जब निकाला गया तब सब उनकी सहनशक्ति देखकर आश्चर्यचकित रह गये । उन्हें तब से ही आजादी के मतवाले उन्मत्त श्रीराम मत्त नाम मिला। अभी भी भी आगरा में उनके साथ रहे या उनसे कुछ सीख लिए अगणित व्यक्ति उन्हें मत्त जी नाम से ही जानते हैं।

लगानबन्दी के आकड़े एकत्र करने के लिए उन्होंने पूरे आगरा जिले का दौरा किया व उनके द्वारा प्रस्तुत वे आँकड़े तत्कालीन संयुक्त प्रान्त के मुख्यमंत्री श्री गोविन्द वल्लभ पंत द्वार गाँधी जी के समक्ष पेश किये गये । बापू ने अपनी प्रशस्ति के साथ वे प्रामाणिक आँकड़े ब्रिटिश पार्लियामेन्ट भेजे, इसी आधार पर पूरे संयुक्त प्रान्त के लगान माफी के आदेश प्रसारित हुए । कभी जिनने अपनी इस लड़ाई के बदले कुछ न चाहा, उन्हें सरकार ने अपने प्रतिनिधि के साथ सारी सुविधाएँ व पेंशन दिया, जिसे उनने प्रधानमंत्री राहत फण्ड के नाम कर दी । वैरागी जीवन का, सच्चे राष्ट्र संत होने का इससे बड़ा प्रमाण क्या हो सकता है? निषाद ने बताया कि गायत्री परिवार द्वारा अनेक प्रकार के रचनात्मक कार्यक्रम के आयोजन से सामाजिक और संस्कृतिक उत्थान के कार्य किये जाते है। आने वाले समय मे हमारा देश विश्व का सिरमौर और विश्वगुरु बनेगा ।

इस रैली को छत्तीसगढ़ की ज़ोन समन्वयक आदर्श वर्मा दीदी, प्रमुख ट्रस्टी श्याम बैस, प्रकाश दावड़ा, सुखदेव देवांगन , हनुमान प्रसाद अग्रवाल, उप ज़ोन समन्वयक सी पी साहू, जिला संगठन के सदस्यों ने गायत्री शक्ति पीठ समता कॉलोनी से तिरंगा दिखाकर रवाना किया, जो अग्रसेन चौक, आमापारा,कंकाली तालाब, बूढ़ा तालाब, पुलिस लाइन, टिकरा पारा, पचपेड़ी नाका, रामकृष्ण हॉस्पिटल होते हुए गायत्री शक्तिपीठ दावड़ा कॉलोनी पहुची। इस रैली में गायत्री परिवार के युवा कार्यकर्ता व वरिष्ठ कार्यकर्ता सहित अनेक परिजन शामिल हुए। गायत्री परिवार रायपुर द्वारा स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रातः काल गायत्री शक्ति पीठ रायपुर में ध्वजारोहण का कार्यक्रम भी आयोजित है।

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