आज का पंचांग Today Panchang

सौजन्य: सचिन अग्रवाल (मेरठ)
🇮🇳⛳ सुप्रभात🌞 वन्देमातरम्⛳🇮🇳
🌿🍁🔔🐚🔆 🐚🔔🍁🌿
ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः


रविवार, ⓵⓪ अक्टूबर ⓶⓪⓶⓵
पूर्णिमांत माह : आश्विन
अमावस्यांत माह : आश्विन
पक्ष : शुक्ल पक्ष
तिथि : पंचमी (२६:१३:४७+)
नक्षत्र : अनुराधा (१४:४२:५६)
योग : आयुष्मान
विक्रम सम्वत : २०७८ आनन्द
शक सम्वत : १९४३ प्लव
युगाब्द : ५१२३
आयन : दक्षिणायन
ऋतु : शरद
सूर्योदय : ०६:१७
सूर्यास्त : १७:५५
अभिजीत मुहूर्त : ११:४३ से १२:२९
राहुकाल : १६:२७ से १७:५५
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प्रभात दर्शन-
मां स्कन्दमाता उपासना 
माँ दुर्गा का पंचम रूप स्कन्दमाता के रूप में जाना जाता है। भगवान स्कन्द कुमार (कार्तिकेय)की माता होने के कारण दुर्गा जी के इस पांचवे स्वरूप को स्कंद माता नाम प्राप्त हुआ है। भगवान स्कन्द जी बालरूप में माता की गोद में बैठे होते हैं इस दिन साधक का मन विशुध्द चक्र में अवस्थित होता है। स्कन्दमातृस्वरूपिणी देवी की चार भुजायें हैं, ये दाहिनी ऊपरी भुजा में भगवान स्कन्द को गोद में पकडे हैं और दाहिनी निचली भुजा जो ऊपर को उठी है, उसमें कमल पकडा हुआ है। माँ का वर्ण पूर्णतः शुभ्र है और कमल के पुष्प पर विराजित रहती हैं। इसी से इन्हें पद्मासना की देवी और विद्यावाहिनी दुर्गा देवी भीकहा जाता है। इनका वाहन भी सिंह है। 
माँ स्कंदमाता सूर्यमंडल की अधिष्ठात्री देवी हैं। इनकी उपासना करने से साधक अलौकिक तेज की प्राप्ति करता है। यह अलौकिक प्रभामंडल प्रतिक्षण उसके योगक्षेम का निर्वहन करता है। एकाग्रभाव से मन को पवित्र करके माँ की स्तुति करने से दुःखों से मुक्ति पाकर मोक्ष का मार्ग सुलभ होता है। 

मंत्र-
सिंहासना गता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया।
शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी।।
या देवी सर्वभू‍तेषु माँ स्कंदमाता रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

🍁🦚 आपका दिन मंगलमय हो 🦚🙏
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पंचम नवरात्र (माँ स्कन्दमाता उपासना), प्रसिद्ध उपन्यासकार आर. के. नारायण जी की जयंती, विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस

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