आज का पंचांग Today Panchang

सौजन्य: सचिन अग्रवाल (मेरठ)
🇮🇳⛳ सुप्रभात🌞 वन्देमातरम्⛳🇮🇳
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ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः


शनिवार, ⓪⓽ अक्टूबर ⓶⓪⓶⓵
पूर्णिमांत माह : आश्विन
अमावस्यांत माह : आश्विन
पक्ष : शुक्ल पक्ष
तिथि : तृतीया (०७:४८:१७, चतुर्थी)
नक्षत्र : विशाखा (१६:४६:०४)
योग : प्रीति
विक्रम सम्वत : २०७८ आनन्द
शक सम्वत : १९४३ प्लव
युगाब्द : ५१२३
आयन : दक्षिणायन
ऋतु : शरद
सूर्योदय : ०६:१७
सूर्यास्त : १७:५६
अभिजीत मुहूर्त : ११:४३ से १२:२९
राहुकाल : ०९:११ से १०:३९

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प्रभात दर्शन-
माँ चंद्रघंटा उपासना
हिन्दू नवरात्रि के तीसरे दिन शक्ति के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा की पूजा-वंदना की जाती है। देवी के इस तीसरी स्वरूप का रूप बेहद खूबसूरत है। माता के माथे पर घंटे आकार का अर्धचन्द्र है, जिस कारण इन्हें चन्द्रघंटा कहा जाता है।
इनका रूप परम शांतिदायक और कल्याणकारी है। माता का शरीर स्वर्ण के समान उज्जवल है, इनका वाहन सिंह है और इनके दस हाथ हैं जो की विभिन्न प्रकार के अस्त्र-शस्त्र से सुशोभित रहते हैं। सिंह पर सवार मां चंद्रघंटा का रूप युद्ध के लिए उद्धत दिखता है और उनके घंटे की प्रचंड ध्वनि से असुर और राक्षस भयभीत करते हैं। ऐसी मान्यता है कि भगवती चंद्रघंटा की उपासना करने से भक्त आध्यात्मिक और आत्मिक शक्ति प्राप्त करता है। पूर्ण विधि से मां की उपासना करने वाले भक्त को संसार में यश, कीर्ति एवं सम्मान प्राप्त होता है।
मंत्र 
पिण्डज प्रवरारुढ़ा चण्डकोपास्त्र कैर्युता। 
प्रसादं तनुते मह्यं चंद्र घंष्टेति विश्रुता।। 

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माँ कूष्मांडा उपासना
श्री दुर्गा का चतुर्थ रूप श्री कूष्मांडा हैं। अपने उदर से अंड अर्थात् ब्रह्मांड को उत्पन्न करने के कारण इन्हें कूष्मांडा देवी के नाम से पुकारा जाता है। नवरात्रि के चतुर्थ दिन इनकी पूजा और आराधना की जाती है। 
श्री कूष्मांडा कीउपासना से भक्तों के समस्त रोग-शोक नष्ट हो जाते हैं। इनकी आराधना से मनुष्य त्रिविध ताप से मुक्त होता है। माँ कुष्माण्डा सदैव अपने भक्तों पर कृपा दृष्टि रखती है। इनकी पूजा आराधना से हृदय को शांति एवं लक्ष्मी की प्राप्ति होती हैं।
मंत्र- 
सुरासम्पूर्णकलशं रूधिराप्लुतमेव च। 
दधानाहस्तपद्याभ्यां कुष्माण्डा शुभदास्तु में॥ 

🍁🦚 आपका दिन मंगलमय हो 🦚🙏
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तृतीय नवरात्र (माँ चंद्रघंटा उपासना), चतुर्थ नवरात्र (माँ कुष्मांडा उपासना)

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