UP Panchayat President Election: अपनों के धोखे के चलते हारे चुनाव-अखिलेश यादव

जिला पंचायत अध्य्क्ष के चुनाव में सपा को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा है। Yogi सरकार पर विपक्ष सत्ता की हनक दिखाने का गंभीर आरोप लगा रहा है। वहीं कई जिलों में छिटपुट घटनाओं की खबरे भी सामने आयी है। जहाँ धरना-झड़प-लाठीचार्ज होने की खबर है। वहीं कुछ महीनों पहले हुये चुनावों में सपा ने धमाकेदार जीत दर्ज करते हुये 816 पंचायत सदस्य बनाये थे। इन चुनावों के बाद मौजूदा BJP सरकार चौंक सी गयी थी।


क्या इतिहास खुद को दोहराएगा???
वहीं जिला पंचायत अध्य्क्ष के चुनावों में कुछ नया नहीं हुआ है। अगर पीछे जाकर देखें तो स्थिति हमेशा सत्ता पक्ष के तरफ ही हमेशा ही झुकती दिखाई देती है। सन 2010 में BSP ने 75 जिलों के चुनावों में 60 जिला पंचायत बनाये। 2016 में सपा शासन काल में इसमें बढ़ोतरी हुई समाजवादी पार्टी ने 65 जिला पंचायत अध्य्क्ष बना सत्ता की हनक दिखाई। मौजूदा 2021 में उसकी ही पुनरावृत्ति होते ही BJP ने 67 जिलों में कब्जा जमाया है।

बात करें तो इन चुनावों में साम,दाम,दंड,भेद के तरीके समय के अनुसार बदलते रहे लेकिम इतिहास गवाह है कि जिसने भी सत्ता की हनक दिखाई जनता ने उसे फिर उसे अपना सिरमौर नहीं बनाया। चुनाव विश्लेषक 2022 के विधानसभा चुनाव में चौंकाने वाले नतीजे आने से बिल्कुल भी इंकार नहीं कर रहे है। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इन चुनावों के बारें में बोलते हुये कहा है कि हमारी पार्टी जिला स्तरीय प्रबंधन बनाने में Fail साबित हुई है।

कुछ अपनों के बागी तेवरों के चलते भी खेल बिगड़ा है इस चुनाव की जिम्मेदारी सबंधित जिलों के जिला कमेटी को दी गयी थी जिसके कारण 21 जिलों में सपा की जीत वाली जगह में हार हुई है।

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